Sahityayan

Friday, 25 April 2014

चयनित ग़ज़लें

चयनित ग़ज़लें 

जो सच बतला रहे हो 
क़सम क्यों खा रहे हो 
किसे बरबाद करके 
बहुत पछता रहे हो 
इरादे नेक तो हैं 
करम फ़रमा रहे हो 
पता भी है तुम्हें,तुम 
कभी दरिया रहे हो 
इधर भी हो, उधर भी 
किसे बहका रहे हो 

- दीक्षित दनकौरी

मुफ़्त मिला सामान नहीं हूँ 
मैं तुझ पर अहसान नहीं हूँ 
तेरी एक ज़रुरत हूँ मैं 
अनचाहा मेहमान नहीं हूँ 
बंद न कर खिड़की दरवाज़े 
मैं आँधी - तूफ़ान नहीं हूँ 
मोल-भाव चाहे तो कर ले 
राशन की दूकान नहीं हूँ 
राज दिलों पर करता हूँ मैं 
सरकारी सम्मान नहीं हूँ 

-दीक्षित दनकौरी 
09899172697

नुमाइश के लिए गुलकारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
लड़ाई की मगर तैयारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
मुलाक़ातों पे हँसते, बोलते हैं मुस्कराते हैं
तबीयत में मगर बेज़ारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
खुले रखते हैं दरवाज़े दिलों के रात-दिन दोनों
मगर सरहद पे पहरेदारियाँ दोनों तरफ़ से हैं 
उसे हालात ने रोका मुझे मेरे मसायल ने 
वफ़ा की राह में दुश्वारियाँ दोनों तरफ़ से हैं
मेरा दुश्मन मुझे तकता है, मैं दुश्मन को तकता हूँ 
कि हायल राह में किलकारियाँ दोनों तरफ़ से हैं 
मुझे घर भी बचाना है वतन को भी बचाना है
मिरे कांधे पे ज़िम्मेदारियाँ दोनों तरफ़ से हैं ।


---- मुनव्वर राना 
( सन्ध्या सिह के सौजन्य से) 


थोड़ी प्यास बचा कर रखना
अपनी आस बचा कर रखना
आज नहीं तो कल जीतेंगे
यह विशवास बचा कर रखना
सब खोना लेकिन हिम्मत को
अपने पास बचा कर रखना
जहाँ उड़ सकें रोज परिंदे
वो आकाश बचा कर रखना
पतझर होते नए दौर में
तुम मधुमास बचा कर रखना
मरना भी क्यों मनहूसी में
कुछ परिहास बचा कर रखना
तुम भी इक इंसान हो पंकज
यह अहसास बचा कर रखना
__ गिरीश पंकज
( राय पुर ,छत्तीसगढ़ )

फिर छिड़ी रात बात फूलों की
रात है या बारात फूलों की ।
फूल के हार, फूल के गजरे
शाम फूलों की रात फूलों की ।
आपका साथ, साथ फूलों का
आपकी बात, बात फूलों की ।
नज़रें मिलती हैं जाम मिलते हैं
मिल रही है हयात[1] फूलों की ।
कौन देता है जान फूलों पर
कौन करता है बात फूलों की ।
वो शराफ़त तो दिल के साथ गई
लुट गई कायनात[2] फूलों की ।
अब किसे है दमाग़े तोहमते इश्क़
कौन सुनता है बात फूलों की ।
मेरे दिल में सरूर-ए-सुबह बहार
तेरी आँखों में रात फूलों की ।
फूल खिलते रहेंगे दुनिया में
रोज़ निकलेगी बात फूलों की ।
ये महकती हुई ग़ज़ल 'मख़दूम'
जैसे सहरा में रात फूलों की ।
---मख़्दूम मुहीउद्दीन