Sahityayan

Sunday, 17 January 2016

अमेरिकी कवि जान हवर्ड का अमर गीत प्रसंग


*** गृहस्थी हीन एक गृह कवि ***
मित्रों, अभी चार दिन पहले मैंने "घर" शिर्षक चार पंक्तियाँ पेश की थी जिसमें Home Sweet Home के प्रसिद्ध कवि जन हवार्ड का जिक्र था। मित्रों के आग्रह पर जन हवार्ड के बारे में ये कुछ पंक्तियाँ...
जन हवार्ड (June 9, 1791----April 10, 1852)। पुरा नाम जन हवार्ड पाइन(John Howard Payne)। अमेरिकी कवि, अभिनेता व नाट्यकार। परन्तु उनकी सफलता के साक्षी लण्डन की गलियाँ हैं जहाँ के थियेटरों ने उन्हे इज्जत और शोहरत दी...!
जन्म न्यूयर्क में। बचपन काफी तंग बिता। बचपन से ही अभिनय और नाटक प्रति समर्पित।
Home Sweet Home 1822 की रचना है। Henry Bishop ने जब इसे संगीत देकर बजाया तो मानो पुरा यूरोप रो पडा..! गिर्जा घरों में बजाई जानी वाली गीत-संगीत के उपरान्त यूरोप व अमेरिका का यह सर्वाधिक गाये जाने वाला जनप्रिय गीत रहा है।
लण्डन की गलियों से होकर जब उनकी प्रसिद्धि पुरी यूरोप और मातृभूमि अमेरिका तक फैली, इसी सुवास से प्रभावित हो अमेरिकी राष्ट्रपति John Tyler ने उन्हे 1842 में ट्यूनिस (वर्तमान Tunisia) में अमेरिकी वानिज्य दूत नियुक्त की। 1842 से 1852 तक लगभग दस साल वह ट्यूनिस में वानिज्य दूत रहे और उसी दौरान 1852 में ट्यूनिस में ही उनका देहान्त हुआ।
उनका सबसे अहम पक्ष ये रहा दोस्तों, जो कवि Home Sweet Home लिखता है उसकी खुद की कोई गृहस्थी नहीं थी। वह अविवाहित रहे। जिन्हे Prince of Bohemians कहा जाता है और आवारगी जिसकी मंजिल रही दुनीया की सबसे खूबसूरत घर की कल्पना भी वही कर सकता था...!
हाँ, दोस्तों,
जिसने पाई न हो जो हद
गुजर सकता है वही उस हद तक...! और चारदिवारी पाटके बनने वाले मकानों में तो हर कोई रह लेता है, मित्रों, पर घर तो लाखों-हजारों में किसीको नसीब होता है...है न....!
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© * गोविन्द आचार्य *

--- गोविन्द आचार्य से साभार